गुरुवार, 12 जुलाई 2018

आज मुझे एक आसमान मिला है
आसमान से बहुत बड़ा,,,,
मैं टांक रही हूँ उसमे,,
खुशियों का सूरज
हँसता हुआ चाँद,,,,
और फिर मुट्ठी में लेकर
मुस्कुराहटों के तारे
बिखेर दिए आसमान के दामन पर,,,,
देखो अपनापन लिए
आने लगे मेहमानों के बादल ,,
मैं भी स्वागत में खड़ी हूं,
द्वार पर,,,,
इंद्रधनुष का तोरण लिए,,,
आखिर इस आसमान में भी
मैंने रिश्ते बना ही लिये ,,,,,,,

नम्रता सरन"निर्मल"
भौपाल मप्र
कॉपीराइट एक्ट के अधीन

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